पेंशनर्स को सातवें वेतनमान के एरीयर्स का भुगतान नहीं, सरकार के खिलाफ भारी रोष एवं असंतोष व्याप्त

भोपाल। कांग्रेस सरकार ने चुनाव के समय वचन पत्र में पेशनर्स को सातवे वेतनमान के एरियर्स का भुगतान को प्राथमिकता देने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई है। सरकार को बने हुए एक साल से अधिक समय गुजर गया जिसके चलते पेशनर्स में रोष बना हुुआ है। विधानसभा चुनावी वचनपत्र में उल्लेखित किया गया था कि मप्र के पेंशनर्स को सातवें केंद्रीय वेतनमान के 27माह के वेतन-एरियर्स का तुरंत भुगतान किया जावेगा। लगभग 250 बिन्दुओं के वचनपत्र के इस एक मात्र बिन्दु में तुरंत शब्द का उल्लेख किया गया था। किन्तु दुर्भाग्यवश अन्य बिन्दुओं की पूर्ति के प्रयास एवं जन आंदोलनों की भीड़ मैं मप्र के पेंशनर्स को तुरंत भुगतान किया जानेवाला वचनपत्र को पूरा क्यों नहीं किया  गया। पेंशनर्स को सातवें केंद्रीय वेतनमान के 27माह के एरियर्स का तुरंत भुगतान किया जाना आवश्यक है। जिस पर मप्र के मुख्यमंत्री को प्राथमिकता से ध्यान देकर तत्काल आदेश जारी करना चाहिए जिससे कि मप्र के साड़े चार लाख पेंशनर्स में व्याप्त रोष एवं असंतोष समाप्त हो। पेंशनर्स व उनके जीवन साथी व्रद्धावस्था के कारण अनेक बीमारियों से ग्रस्त हैं जिनहे मूलभूत आवश्यक्ताओं के अतिरिक्त चिकित्सा पर भारी राशि व्यय करनी पड़ती है। आर्थिक अभाव में चिकित्सा पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। वर्तमान बेरोजगारी की भीषण स्थिति में अनेक पेंशनरों को मजबूरी में अपने आश्रितों की देखभाल करना पड़ती है। लेकिन आर्थिक अभाव में उनकी देखभाल में बहुत परेशानी होती है। वर्तमान मंहगाई की स्थिति में जीवनयापन का खर्च बड़ता जा रहा जबकि पेंशनर्स का आय श्रोत एक मात्र उनकी स्थिर पेंशन है। वरिष्ठ एवं अतिवरिष्ठ पेंशनर्स अपनी आयु के अंतिम पड़ाव पर हैं और एरियर्स के भुगतान में विलंब होने की दशा में अनेक पेंशनर्स आर्थिक पीड़ा झेलते हुए स्वर्गवासी होते जाएंगे व बाद शासन को उनके उतराधिकारियों को एरियर्स का भुगतान करना पड़ेगा जोकि निरर्थक है।