भाजपा विधायक शरद कोल न भाजपा के रहे न कांग्रेस के

मध्य प्रदेश के ब्योहारी विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक शरद कोल को दो नाव की सवारी महंगी पड़ गई। वह कभी कांग्रेस के साथ तो कभी भाजपा खेमे में नजर आ रहे थे। कमल नाथ सरकार को बचाने के गणित में उन्होंने इस्तीफा तक दे दिया था, लेकिन जैसे ही सरकार के जाने का आभास हुआ वह भाजपा के साथ हो गए थे, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने शुक्रवार को उनका इस्तीफा मंजूर कर संकट में डाल दिया। उधर, कोल का कहना है कि 16 मार्च को ही इस्तीफा वापस लेने का पत्र लिख दिया था।


कोल की पारिवारिक पृष्ठभूमि कांग्रेस की है। वे चुनाव जीतने के बाद से ही मुख्यमंत्री कमल नाथ के प्रति कई बार हमदर्दी जता चुके हैं। पिछले साल विधानसभा सत्र के दौरान भी एक विधेयक पर मत विभाजन के दौरान कोल कांग्रेस के साथ खड़े दिखाई दिए थे। तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि कोल भाजपा का साथ छोड़ सकते हैं, पर जब कमल नाथ सरकार के अल्पमत में आने की संभावना बनी, तो कोल भाजपा के पाले में आ गए। पिछले कुछ दिनों से वे भाजपा कैंप में ही डेरा डाले हुए थे। इस्तीफा मंजूर होने पर हैरान कोल का कहना है कि उनके खिलाफ षड्यंत्र किया गया।


वहीं इस्तीफे पर भाजपा विधायक शरद कोल ने कहा कि मुझसे दबाव में इस्तीफा लिखवाया गया था। 16 मार्च को ही मैंने विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय को भी पत्र दे दिया था कि उनका त्यागपत्र स्वीकार न किया जाए।


इस मामले में मप्र विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने कहा कि कोल के इस्तीफे को अभी होल्ड पर रखा गया है।


कांग्रेस के 22 बागी विधायकों के इस्तीफे के बाद भाजपा विधायक शरद कोल ने स्पीकर एनपी प्रजापति को अपना इस्तीफा सौंपा है। स्पीकर ने शुक्रवार को उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। हालांकि शरद कोल का कहना है कि उन्होंने इस्तीफा वापस लेने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन स्पीकर एनपी प्रजापति ने कहा कि उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया है।


 


साभार - जागरण