MP में घमासान के बाद देर से टूटी सिंधिया की चुप्‍पी, क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक है?


भोपाल. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) की चुप्पी देर से टूटी, लेकिन ये सवालों के घेरे में है. अब सवाल उठने लगा है कि क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक चल रहा है. जिस वक्‍त पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगा रहे थे, तब सिंधिया ने चुप्पी साध ली. जब कांग्रेस अपने 6 विधायकों को वापस अपने पाले में लेकर आ गई है, तब जाकर सिंधिया ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए एक ट्वीट किया है. हालांकि उनके खेमे से आने वाले मंत्री उमंग सिंघार ने चुटकी लेते हुए इस पूरे मामले को राज्यसभा से जोड़कर बता दिया.


खुद सीएम कमलनाथ (CM Kamalnath) इसे सरकार को अस्थिर करने के लिए बीजेपी की साजिश करार दे रहे हैं. वहींं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के आरोपों से किनारा करते हुए इसे कांग्रेस के अंदर की लड़ाई बताया है.

सिंधिया खेमे में क्या चल रहा है?
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है. उन्होंने सबसे पहले इस बात का खुलासा किया कि बीजेपी के नेता उनके विधायकों को करोड़ों का ऑफर दे रहे हैं. सिंह ने ही ट्वीट कर बसपा विधायक रामबाई को दिल्ली ले जाने का आरोप पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह पर लगाया था. इस आरोप के 24 घंटे के बाद ही आठ से दस विधायकों को बंधक बनाने का पूरा मामला सामने आया है. भोपाल से लेकर दिल्ली तक राजनीति गर्म हो गई. कमलनाथ सरकार के मंत्री तरुण भनोत, जीतू पटवारी, जयवर्धन सिंह दिल्ली पहुंच गए. उनके साथ दिग्विजय सिंह भी दिल्ली में डटे रहे. छह विधायकों को दिल्ली से भोपाल लाया भी गया है.

कांग्रेस के तमाम नेता अब सरकार पर किसी तरह का खतरा नहीं बता रहे हैं, लेकिन इस सबके बीच सिंधिया की चुप्पी देर से टूटने पर कई सवाल खड़े होने लगे हैं. इतना ही एक तरफ पूरी सरकार बंधक बनाए गए विधायकों को भोपाल लाने में जुटी थी, तो वहीं दूसरी तरफ सिंधिया खेमे के तीन मंत्री आपस में मीटिंग कर रहे थे. उन्होंने सीएम हाउस में हुई बैठक से भी दूरी बनाए रखी. अब इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं. सिंधिया की चुप्पी छह विधायकों के भोपाल आने के बाद टूटी. उन्होंने सिर्फ ट्वीट कर बीजेपी पर हमला बोला. हालांकि सवाल उठ रहा है कि क्या राज्यसभा चुनाव को लेकर यह खींचतान चल रही है. पहले साधी थी चुप्पी, अब बोला हमला
दिग्विजय सिंह के हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों पर सिंधिया ने सबसे पहले चुप्पी साध ली थी. उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था कि मुझे इन तथ्यों की कोई भी जानकारी नहीं है. प्रदेश में जनता के बलबूते कांग्रेस आई है. जनता के हितों के लिए काम कर रहे थे. आगे भी जनता के हितों के लिए काम करते रहेंगे. मंगवालर को एक दिन के ग्वालियर दौरे पा आए सिंधिया ने मीडिया से बातचीत करते हुए यह सभी बातें की थी. इस चुप्पी से लग रहा था कि सरकार के संकट के दौर से सिंधिया ने किनारा कर लिया है, लेकिन जब बंधक बनाए गए छह विधायक वापस भोपाल आए, तो सिंधिया ने ट्वीट के जरिए बीजेपी पर हमला बोला. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि विधायकों की खरीद-फरोख्त बीजेपी की पुरानी परंपरा है, लेकिन वह इस कोशिश में कामयाब नहीं होगी. प्रदेश की कांग्रेस सरकार को कोई खतरा नहीं है. कांग्रेस में सब एकजुट हैं.

सिंघार ने राज्यसभा चुनाव से जुड़ा घटनाक्रम बतायासिंधिया खेमे से आने वाले मंत्री उमंग सिंघार ने पहले दिन सिंधिया की तरह कोई भी टिप्पणी नहीं की थी. सरकार में इतना बड़ा घटनाक्रम चलता रहा और ऐसे वक्त में उनकी तरफ से कोई भी बयान नहीं आया. अब दूसरे दिन जब सिंधिया ने चुप्पी तोड़ी, तो उमंग सिंघार ने भी सियासी ट्वीट कर दिया. उनके हिसाब से यह पूरा घटनाक्रम राज्य सभा चुनाव को लेकर हो रहा है. उन्होंने चुटकी भी ली और लिखा कि माननीय कमलनाथ की सरकार पूर्ण रूप से सुरक्षित है. यह राज्यसभा में जाने की लड़ाई है, बाकी आप समझदार हैं. अब इस ट्वीट के हिसाब से यह सबकुछ कोई राज्य सभा में जाने के लिए कर रहा है. इसके मायने निकाले जाएं, तो मध्य प्रदेश से दिग्विजय सिंह और विवेक तन्खा राज्यसभा सदस्य हैं. सिंह के नाम पर संशय बना हुआ है, तो मध्‍य प्रदेश के मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने प्रदेश से प्रियंका गांधी को राज्य सभा सदस्य बनाने की मांग उठाई थी. जबकि इस रेस में सिंधिया का नाम भी चल रहा है.

शिवराज के बयान के सियासी मायने
दिग्विजय सिंह के आरोपों पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पहले ही दिन कहा था कि दिग्विजय सिंह का कोई काम नहीं हुआ होगा, इसलिए वह सरकार को ब्लैकमेल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई कांग्रेस के अंदर की है. दिग्विजय सिंह और सिंधिया के बीच क्या चल रहा है, सभी को पता है. यही बात नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने भी कही थी. जबकि पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि बीजेपी पर लगाए आरोप गलत हैं. यह सब कांग्रेस के अंदर चल रही अंतरकलह की वजह से हो रहा है.

मीटिंग थी, लेकिन सिर्फ गले मिले
अब यह साफ हो गया है कि राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के अंदर बहुत खींचतान है. एक-एक सीट बीजेपी और कांग्रेस को मिल रही है, लेकिन तीसरी सीट के लिए जबरदस्त घमासान मचा है. कांग्रेस में नए उम्मीदवारों के नाम आने से हलचल तेज हो गई है. कौन किसे बनाना चाहता है, उसको को लेकर अब लॉबिंग की जा रही है, लेकिन हाल ही में एक ऐसी तस्वीर सामने आई थी, जिसके जरिए शायद यह बताने की कोशिश की जा रही थी कि कांग्रेस के अंदर सबकुछ ठीक चल रहा है. अब मौजूदा सियासत से लग रहा है कि कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है. गुना में पहले सिंधिया और दिग्विजय सिंह के बीच मीटिंग तय हुई, लेकिन ऐन वक्त पर यह मीटिंग नहीं हो सकी और दोनों नेता सिर्फ गले मिले.