MP से सिंधिया BJP ​के राज्यसभा उम्मीदवार, प्रभात झा-जटिया का टिकट कटा


सदन में 50% विधायक इस्तीफा दे देते हैं और मुख्यममंत्री कमलनाथ विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दें तो मध्यावधि चुनावों की नौबत आ सकती है. अब देखना होगा कि मध्य प्रदेश में मध्यावधि चुनाव होते हैं या सरकार बनती है.


भोपाल: इधर ज्योतिरादित्य सिंधिया 'कमल का फूल' थामने के लिए दिल्ली स्थित बीजेपी हेडक्वार्टर पहुंचे ही थे कि मध्य प्रदेश से उनकी राज्यसभा उम्मीदवारी का ऐलान हो गया. ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा ने मध्य प्रदेश से अपना राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है. आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 26 मार्च को चुनाव होना है.


BJP ने काटा प्रभात झा, सत्यनारायण जटिया का टिकट
इसमें से एक-एक सीट कांग्रेस और भाजपा के पास जानी तय है.


बाकी बचे एक सीट के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच टक्कर होगी ये बात कंफर्म हो चुकी है. बीजेपी कोटे से प्रभात झा और सत्यनारायण जटिया तो कांग्रेस के दिग्विजय सिंह के राज्यसभा का कार्यकाल पूरा हो रहा है. भाजपा ने प्रभात झा और सत्यनारायण जटिया का टिकट काटने का फैसला किया है. इससे प्रभात झा नाराज बताए जा रहे हैं. आपको बता दें कि प्रभात झा भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं.


22 विधायकों के इस्तीफे से बिगड़ा कांग्रेस का समीकरण
आपको बता दें कि सिंधिया के कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने के बाद कमलनाथ सरकार से 22 विधायकों ने अपना समर्थन वापस ले लिया है. इसके बाद राज्य में कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई है और भाजपा के पास सरकार बनाने का अच्छा मौका है. एक राज्यसभा सीट के लिए 58 विधायकों का समर्थन होना जरूरी होता है. बीते मंगलवार को कमलनाथ ने कांग्रेस पार्टी विधायक दल की बैठक बुलाई थी. इसमें एक निर्दलीय समेत कुल 94 विधायकों ने हाजिरी लगाई थी.


क्या सिंधिया गुट के 13 विधायक कांग्रेस के संपर्क में हैं?
वहीं भाजपा के पास 107 विधायक हैं. ऐसे में दूसरे राज्यसभा सीट के लिए भाजपा की स्थिति फिलहाल मजबूत दिख रही है. खबर है कि बेंगलुरु में सिंधिया गुट के 19 में से 13 विधायकों ने भाजपा में जाने से इनकार कर दिया है. ये 13 विधायक कर्नाटक कांग्रेस के नेता डीके शिवकुमार के फार्म हाउस में ठहरे हैं. अगर इस बात में सच्चाई है तो फिर मध्य प्रदेश में सियासत किस करवट बैठेगी अभी कह पाना मुश्किल है.


क्या मध्य प्रदेश में कराने पड़ेंगे मध्यावधि चुनाव, तो क्यों?
क्योंकि फिर भाजपा और कांग्रेस दोनों की विधायक संख्या 107-107 हो जाएगी. तब बसपा के दो, सपा का 1 और 4 निर्दलीय विधायक सत्तानायक बन सकते हैं. निर्दलीय विधायकों में से एक सुरेंद्र सिंह शेरा पहले ही कमलनाथ के साथ हैं. सदन में 50% विधायक इस्तीफा दे देते हैं और मुख्यममंत्री कमलनाथ विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दें तो मध्यावधि चुनावों की नौबत आ सकती है. अब देखना होगा कि मध्य प्रदेश में मध्यावधि चुनाव होते हैं या सरकार बनती है.