नाथ हुए अनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री के दखल परिणाम


भोपाल । कांग्रेस की सरकार के मुख्यमंत्री कमलनाथ को उन्हीं की परतु  के पूर्व मुख्यमंत्री की सलाह ने नाथ को अनाथ में बदल दिया। डेढ़ साल से कांग्रेस के अंदर चल रहा शह मात के खेल का एक अध्याय सिंधिया का पार्टी छोड़ने के रूप में हुआ।  प्रदेश में राजनीति  की उठापटक को  पूर्व कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने विराम पार्टी  से इस्तीफ़ा  देकर कर दिया। साथ ही श्रीमान सिंधिया जी के समर्थक 19 विधावकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है ।सिंधिया समर्थको के इस्तीफे से कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई है।  वहीं आज शाम को श्री सिंधिया भाजपा कार्यालय में सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। इसी के साथ मध्य प्रदेश में नई सरकार के गठन को लेकर भाजपा की गतिविधियां तेज हो जाएगी। वहीं अब सूत्रों से जानकारी मिली है कि राज्यपाल लालजी टंडन 5 दिन से छुट्टी पर गए हुए थे वह भी बीच में वापस आ रहे हैं इससे लगता है की भाजपा की पहले से ही पूरी तैयारी थी। 


फिर वनवास में धकेला  पूर्व मुख्यमंत्री के दखल  ने



कांग्रेस पार्टी को एक बार फिर से अंदरूनी लड़ाई के चलते सरकार से हाथ धोना पड़ गया। वहीं इस पूरे मामले में  शीर्ष नेतृत्व की न समझी भी रही,।  सरकार के गठन के बाद ही सिंधिया समर्थकों की मांग थी कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए जिस पर कोई विचार नहीं किया गया और अब राज्यसभा सदस्य की बात आई तो वहां पर भी पूर्व मुख्यमंत्री को राज्यसभा भेजने की तैयारी थी। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी हठ धर्मिता ने फिर से 15 वर्षों के लिए अज्ञात वास में भेज दिया। ये वही बंटाढार हैं जिन्होंने प्रदेश के सभी तबके को  नाराज किया था। जिस वजह से 15 साल कांग्रेस को सरकार से बाहर रहना पड़ा। इनका तो सोचना था कि में नहीं तो कोई नहीं। उसी तर्ज पर कमलनाथ सरकार का अंत करवा दिया। प्रदेश को इस मुख्यमंत्री मंत्री शायद अब नहीं मिलेगा । कमलनाथ ही ऐसे मुख्यमंत्री हुए जो यहां पर इन्वेस्टर ला सकते थे। जिसे उस पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेश को   व प्रदेश की जनता के सपने कोकॉम कर दिया।