राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2017-18 की प्रथम तिमाही के कर निर्धारण प्रकरणों के निराकरण के लिये समय-सीमा बढ़ाई गई

प्रदेश में वाणिज्यिक कर विभाग में व्यवसाइयों के वर्ष 2017-18 की प्रथम तिमाही के विभिन्न अधिनियमों के कर निर्धारण प्रकरणों के निराकरण के लिये समय-सीमा 29 फरवरी, 2020 से बढ़ाकर 30 जून, 2020 कर दी गई है। राज्य शासन द्वारा यह कार्यवाही व्यवसाइयों के व्यापक हित में की गई है। व्यवसाइयों को जीएसटी के अंतर्गत प्रतिमाह रिटर्न प्रस्तुत करना होता है। इसके साथ ही उन्हें जीएसटी की वार्षिक विवरणी प्रस्तुत की जानी थी। इस प्रकार की परिस्थितियों से उन्हें कर निर्धारण कराने में असुविधा हो रही थी। कर-दाताओं एवं कर सलाहकारों द्वारा यह तथ्य राज्य शासन के ध्यान में लाया गया, जिस पर पूर्ण विचार करते हुए राज्य शासन द्वारा कर-दाताओं को उक्त अवधि के प्रकरणों के निराकरण के लिये अधिक समय मिल सके, इसके लिये वर्ष 2017-18 की प्रथम तिमाही के (जीएसटी लागू होने की पूर्व की अवधि) प्रकरणों के निराकरण के लिये समय-सीमा 29 फरवरी, 2020 से बढ़ाकर 30 जून, 2020 की जाकर व्यवसाय जगत को एक बड़ी राहत दी है।


मध्यप्रदेश राज्य जीएसटी के अंतर्गत जनवरी-2020 के लिये देय मासिक विवरणी जमा कराने में भारत के अनेक राज्यों को पीछे छोड़ते हुए दूसरे स्थान पर


मध्यप्रदेश राज्य पूरे भारत देश में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कर-दाताओं से माह जनवरी, 2020 का रिटर्न प्रस्तुत कराने में दूसरे स्थान पर रहा है। प्रदेश में जीएसटी के अंतर्गत 3 लाख 47 हजार पंजीयत करदाता मासिक चुकाने मासिक विवरणी प्रस्तुत करने के दायी हैं, इनमें से लगभग 3 लाख 6 हजार कर-दाताओं द्वारा मासिक विवरण-पत्र GSTR-3B प्रस्तुत कर दिये गये हैं। इस प्रकार प्रदेश के लगभी 88 प्रतिशत कर-दाताओं द्वारा रिटर्न प्रस्तुत कर दिये गये हैं। अनेक राज्यों को पीछे छोड़ते हुए मध्यप्रदेश राज्य के कर-दाताओं और कर सलाहकारों द्वारा पूर्ण उत्साह से अधिक से अधिक विवरणी प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। यह निश्चित रूप से प्रदेश के कर-दाताओं के लिये अत्यंत गौरव का विषय है। विभागीय अधिकारियों द्वारा इस दिशा में निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। इस कार्य में सभी कर-दाताओं का, कर सलाहकारों का एवं चार्टर्ड एकाउंटेट्स का महत्वपूर्ण योगदान रहा है