मां ने वो टीन का बक्सा फिर खुलवाया है... राधारमन ग्रुप के विहान कार्यक्रम में कवियों और शायरों ने बांधा
अरे ! यह देख यह फ्रॉक मैंने बचपन में तुझे पहनाई थी, जिसे पहनाकर खुशियां भी खिलखिलाईं थी...।  सिविल संकाय के द्वितीय वर्ष के छात्र ईशान सक्सेना ने जब इन पंक्तियों के साथ अपनी कविता पढऩा शुरू की, तो तमाम श्रोता अपने बचपन में चले गए।  बचपन से कुछ ही दूर पहुंचे छात्रों ने कविता को खूब सराहा। ईशान की इस कविता ने छात्र-छात्राओं की जमकर तालियां बटोरीं। यह नजारा देखने को मिला राधारमन ग्रुप के विहान सांस्कृतिक कार्यक्रम में। विहान के अंतर्गत काव्य पाठ प्रारंभ हुआ, तो उसमें कई नए कवियों ने शिरकत की, परंतु डीन एसबी खरे अपने पुराने रंग में नजर आए। शेर-शायरी के साथ उन्होंने छात्रों को जहां मोबाइल के खतरे भी बताए, तो वहीं उन्हें इकबाल से लेकर कई शायरों के खूबसूरत कलाम सुनाकर माहौल को रूहानी बना दिया। श्री खरे ने इस काव्य पाठ के आयोजन की भी सराहना की और युवा कवियों का उत्साहवर्धन किया। युवा कवियों ने आधुनिक माहौल से लेकर युवा मन पर रचित कविताओं का सस्वर पाठ किया। ग्रुप के संजीव सक्सेना ने सुरीले अंदाज में फिल्मी गीत गाया, तो पूरा हाल तालियों से गूंज उठा।