मेरा स्वप्न है कि हर व्यक्ति को घर पर मिले शुद्ध जल : मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा है कि आने वाले समय में पानी की उपलब्धता समाज और सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। सब मिलकर ही इसका मुकाबला कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि मेरा स्वप्न है कि हर व्यक्ति को शुद्ध जल उसके घर पर मिले। यह स्वप्न सबका हो, तो जरूर इसमें सफल होंगे। श्री कमल नाथ मिंटो हाल में जलाधिकार कानून को लेकर मध्यप्रदेश सरकार और जल-जन जोड़ो आंदोलन द्वारा संयुक्त रूप रूप से आयोजित राष्ट्रीय जल सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।









मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ की वजह से सुरक्षित हैं चार राज्यों के अरावली पर्वत


जल पुरुष एवं मेगसेसे पुरस्कार प्राप्त प्रो. राजेन्द्र सिंह ने राष्ट्रीय जल सम्मेलन में बताया कि मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ से उनके वर्ष 1990 से संबंध है। उन्होंने कहा कि श्री कमल नाथ का पर्यावरण के प्रति कितना गहरा जुड़ाव है इसका एक उदाहरण है गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली राज्य में फैले हुए अरावली पर्वत। उन्होंने कहा कि आज यह पर्वत सुरक्षित हैं, तो इसका श्रेय मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ को जाता है। श्री सिंह ने बताया कि 7 मई 1992 को अरावली पर्वत में हो रहे अवैध उत्खन्न और अतिक्रमण को लेकर वे श्री कमल नाथ से मिले थे, तब वे केन्द्र में वन एवं पर्यावरण मंत्री थे। जब उनके समक्ष मैंने यह मुद्दा रखा, तब उन्होंने तत्काल उस समय अरावली पर्वत को बचाने के लिए जो अधिसूचना जारी की, उसके कारण ही वे आज तक सुरक्षित हैं और वहाँ चारों तरफ हरियाली है।



सम्मेलन में 25 राज्य के जल और पर्यावरण से जुड़े समाजसेवी और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। अधिवेशन में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित "राइट टू वाटर" विषय पर विचार- विमर्श होगा।


मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि हमारी सोच के अभाव और लापरवाही के कारण जल संकट बढ़ रहा है, जो आगे चलकर और भी गंभीर होने वाला है। श्री कमल नाथ ने कहा कि 1982 में हुए पृथ्वी सम्मेलन में मैंने इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाया था कि पर्यावरण और जंगल तभी तक सुरक्षित और जीवित हैं, जब तक हमारे पास पानी है। इसलिए पानी बचाने और जल स्त्रोतों को संरक्षित करने का काम सबसे पहले करना होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि आज हमारे 65 बाँध और 165 रिजर्व वायर सूखे की चपट में हैं। स्थानीय निकाय नागरिकों को 2 से 4 दिन में पानी उपलब्ध करवा पा रहे हैं। भविष्य में यह संकट गहराएगा। इसकी चिंता हमें आज से करना होगी। उन्होंने कहा कि हमारे पर्यावरणविद और जल संरक्षण के क्षेत्र में समर्पित भाव से काम करने वाले स्वयंसेवियों को इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि हम लोगों ने मिलकर इसकी आज से चिंता नहीं की, तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी।