वन विकास निगम ने कराये 1,45,28,000 के सीएसआर कार्य

वनों के आसपास रहने वाले 13 हजार 839 लोगों की भलाई के लिये राज्य वन विकास निगम ने सीएसआर (निगमित सामाजिक दायित्व) के तहत वर्ष 2018-19 में एक करोड़ 45 लाख 28 हजार के कार्य कराये। वर्ष 2019-20 में निगम द्वारा एक करोड़ 58 लाख 65 हजार के कार्य कराये जा रहे हैं, जिनका फायदा 22 हजार 147 लोगों को मिल रहा है।


वन विकास निगम प्रदेश में वन सम्पदा बढ़ाने के साथ-साथ महिलाओं, बच्चों, दिव्यांग, युवा वर्ग आदि के प्रति अपने दायित्व का भी निर्वहन कर रहा है। निगम द्वारा युवाओं के लिये कौशल विकास, महिलाओं के लिये सिलाई मशीन वितरण, प्रशिक्षण और गैस सिलेण्डर रिफिलिंग और वनवासियों के लिये स्वास्थ्य शिविर, सामुदायिक भवन, शौचालय, तालाब आदि का निर्माण, दिव्यांगजनों के लिये ट्रायसिकल वितरण आदि कार्य भी सीएसआर के तहत कराये जा रहे हैं। निगम निम्न-कोटि के वन क्षेत्रों को तेजी से बढ़ने वाली बहुमूल्य और बहु-उपयोगी प्रजातियों के रोपण द्वारा उच्च-कोटि के वनों में तब्दील कर उत्पादन क्षमता एवं गुणवत्ता में सुधार लाता है।


वन क्षेत्रों से सटे हुए गाँव के युवा वर्ग को वन विकास निगम कौशल विकास उन्नयन प्रशिक्षण दिलाता है। इससे उन्हें रोजगार मिलता है और उनके परिवारों का आर्थिक उत्थान होता है। निगम द्वारा महिलाओं को आत्म-निर्भर बनाने के साथ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से सिलाई मशीनें वितरित करने के साथ सिलाई का प्रशिक्षण भी दिलाता है। वन क्षेत्रों से लगे शासकीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास के मद्देनजर वन विकास निगम इन विद्यालयों में डेस्क, पेयजल व्यवस्था, वाटर फिल्टर आदि वितरित करता है। इससे छात्र-छात्राएँ स्वस्थ रहने के साथ अपने अध्ययन और खेल प्रतिभा पर बेहतर ध्यान दे पाते हैं।


उज्जवला योजना में गैस सिलेण्डर पाने वाले ग्रामीणों के गैस सिलेण्डर की रिफिलिंग भी निगम करवाता है, ताकि वनों के आसपास रहने वाले ये ग्रामीण सतत गैस का प्रयोग करें और ईंधन के लिये वनों पर निर्भर न रहें। निगम द्वारा ग्रामीणों के लिये विभिन्न सांस्कृतिक उत्सव और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिये सामुदायिक भवनों का निर्माण किया जाता है। वन क्षेत्रों से लगे हुए गाँवों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिये भी निगम प्रयासरत है। स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें नि:शुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाता है। निगम वनों के आसपास रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिये हेण्ड-पम्प, तालाब, शौचालय निर्माण भी कराता है। इसके साथ ही दिव्यांगजनों को ट्रायसिकिल आदि का वितरण भी करता है।