अमीरों के पानी में कितने हाइड्रोजन होते हैं? हमारे में तो दो ही होती हैं









पिछले महीने यानी फरवरी में हुए थे ऑस्कर अवॉर्ड्स. अमेरिका के लॉस एंजिलिस में. किसे अवॉर्ड मिला, किसे नहीं, वो सब जान चुके हैं. अभी बात होगी पानी की उस बॉटल पर, जो ऑस्कर अवॉर्ड्स में आए गेस्ट के सामने मेज पर रखी थी.


600 ml. की इन पानी की बॉटल की कीमत थी 37 डॉलर यानी करीब 2700 रुपए. इतना महंगा पानी? यस. ऐसा पहली बार थोड़े ना है! पिछले कुछ वक्त में तो ऐसी तमाम ‘लाइफस्टाइल’ खबरें आई हैं कि भई विराट कोहली इतना महंगा पानी पीते हैं, करीना कपूर उतना महंगा पानी पीती हैं.


अब सवाल कि ये अमीर लोग जो पानी पीते हैं, उसमें ऐसा क्या ख़ास होता है? जवाब है- अमीरों के पानी में होते हैं ज्यादा हाइड्रोजन.


बचपन में रसायन विज्ञान पढ़े होंगे आप. अगर कमज़ोर भी रहे होंगे, तो पानी का फॉर्मूला तो याद ही होगा- H2O. यानी यानी हाइड्रोजन के दो एटम और ऑक्सीजन के एक एटम से मिलकर बनता है पानी का मॉलीक्यूल. लेकिन गुरू, ये है हमारे-आपके पीने का पानी. अमीरों का पानी होता है ‘हाइड्रोजन वॉटर’.


हाइड्रोजन वॉटर क्या होता है?


आसान शब्दों में…


हाइड्रोजन वॉटर को वेलनेस सेक्टर में नेक्स्ट बिग थिंग माना जा रहा है. शरीर में पानी की क्या अहमियत होती है, वो तो हम जानते ही हैं. लेकिन हाइड्रोजन वॉटर के आने के बाद ये अहमियत और बढ़ रही है. नाम से ही समझने की कोशिश करें, तो जब पानी में साइंटिफिक मैथड्स से अलग से हाइड्रोजन गैस इंजेक्ट कराई जाती है, तो तैयार होता है ‘हाइड्रोजन वॉटर’. इसमें हाइड्रोजन की मात्रा नॉर्मल पानी से ज्यादा होती है.


विज्ञान की भाषा में…


जिस तरह गैस और गैस के बीच रिएक्शन हो सकती है, उसी तरह लिक्विड और गैस के बीच भी. यहां लिक्विड है पानी और गैस है हाइड्रोजन. नॉर्मल वॉटर को हाइड्रोजन वॉटर बनाने के लिए जब इसमें हाइड्रोजन इंजेक्ट कराते हैं, तो पानी में एंटी-ऑक्सीडेंट बढ़ते हैं.


एंटी-ऑक्सीडेंट बॉडी में बनने वाली वो चीज होती है, जो शरीर को अंदर से डिटॉक्स करने में मदद करती है. एंटी-ऑक्सीडेंट अच्छे अमाउंट में बन रहे हों, तो ये उस बुरे असर को भी कम कर देते हैं, जो दूषित वातावरण की वजह से शरीर पर पड़ता है.


हाइड्रोजन वॉटर शरीर को ‘एंटी-ऑक्सीडेंट फैक्टरी’ में बदलने की क्षमता रखता है.


तो क्या पानी का फॉर्मूला बदल जाएगा?


महंगे वाले पानी में ज्यादा हाइड्रोजन होते हैं, तो क्या दशकों-सदियों से जो पानी का फॉर्मूला पढ़ते आ रहे हैं, वो अब बदल जाएगा? जवाब है- नहीं. समझिए..


ये दुनिया कुछ एटम्स, परमाणुओं से मिलकर बनी है. जैसे कि हाइड्रोजन के एटम, ऑक्सीजन के एटम, कार्बन के एटम. अब तक हमें ऐसे कुल 118 टाइप के एटम पता हैं.


एटम्स इंसानों की तरह होते हैं. अकेले नहीं रह पाते. दूसरे एटम्स के साथ रहना पसंद करते हैं. साथ रहने के लिए एटम एक दूसरे के हाथ पकड़ लेते हैं. कैमिस्ट्री में इसे बॉन्ड बनाना कहते हैं. जब इंसान साथ रहते हैं तो परिवार बनता है. और जब एटम बॉन्ड बनाते हैं तो मॉलीक्यूल अणु बनता है..अणु.


पानी का मॉलीक्यूल H2O कहलाता है. यहां एक ऑक्सीजन ने दो हाइड्रोजन को पकड़ रखा है.


हाइड्रोजन वॉटर में परिवार यानी मॉलीक्यूल की बनावट नहीं बदलती, बस एक और परिवार उनके साथ रहने आ जाता है. और उस परिवार का नाम है हाइड्रोजन गैस.


इसीलिए पानी का फॉर्मूला नहीं बदलता. बस, उसकी क्वालिटी बेहतर हो जाती है.


सांप भी मर गया, लाठी भी नहीं टूटी. यानी पानी का फॉर्मूला भी सलामत रह गया और अमीरों का हाइड्रोजन वॉटर भी बन गया. बेचो मस्त 2700 रुपए में 600 ml. लेकिन डोन्ट ट्राई दिस एट होम. इतना हुनर हमारे-आपके पास ना है.