ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद अब किसका नंबर?


ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद कांग्रेस में 'बुर्जुग बनाम युवा नेता' बहस एक बार फिर तेज हो गई है। उनके पार्टी छोड़ने को एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसका कई और युवा नेता अनुकरण कर सकते हैं। 


ज्योतिरादित्य सिंधिया का कांग्रेस छोड़ना ऐसे युवा नेताओं की एक श्रृंखला में नवीनतम है, जो या तो पार्टी छोड़ रहे हैं या सार्वजनिक रूप से विरोध दर्ज करा रहे हैं। उनमें से कुछ नाम हैं- अशोक तंवर, अल्पेश ठाकुर, मौसिम नूर, अशोक चौधरी, नवजोत सिंह सिद्धू, प्रद्योत देब बर्मन, संजय निरुपम और मिलिंद देवड़ा। यदि उनके वरिष्ठ सहयोगियों ने उनके के लिए रास्ता बनाना नहीं जारी रखा, तो पार्टी को अभी और नुकसान झेलना पड़ सकता है।

इसके अलावा इनमें सबसे बड़ा नाम 'टीम राहुल' के सबसे सफल राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का शामिल है, जिनकी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ नाराजगी जगजाहिर है। ऐसे में ये देखना अहम होगा की कांग्रेस इस संकट की घड़ी से कैसे उबरती है।


जब दिग्गी हुए वर्किंग कमिटी से बाहर
सिंधिया ने कमलनाथ-दिग्विजय सिंह की जोड़ी को बताने के लिए कि उन्हें उनकी जगह नहीं मिली है, उन्होंने लोकसभा हारने के 10 महीने के भीतर ही पार्टी छोड़ दी। इसके विपरीत, जब राहुल गांधी ने दिग्विजय को कांग्रेस वर्किंग कमेटी से बाहर कर दिया, तो उन्होंने कुछ नहीं किया, लेकिन मध्य प्रदेश में कांग्रेस को फिर से उभरने और राज करने के लिए नर्मदा के एक राजनीतिक परिक्रमा पर चले गए।


वरिष्ठ नेताओं और युवाओं के बीच मतभेदों की जड़ें इंदिरा व संजय गांधी के समय से निकली, लेकिन बाद में राहुल गांधी के नेतृत्व छोड़ने के बाद भी उन्होंने छोड़ने और छटपटाने के तरीके अपनाए। संयोग से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने, कांग्रेस को हराने से पहले अपनी ही पार्टी के दिग्गज प्रतिद्वंद्वियों को मात देकर अपना नेतृत्व स्थापित किया।


 


साभार -NBT