पड़तालः रमेश गुप्ता की जन्तु विज्ञान वाली किताब में लिखी कोरोना वायरस की दवा फर्ज़ी है

 


 



दावा


एक मेसेज फारवर्ड हो रहा है . इसमें रमेश गुप्ता की ज़ूलॉजी की किताब का एक पन्ना है. बताया जा रहा है कि इस किताब में कोरोना वायरस की दवाई लिखी है.


मैसेज में जो लिखा है, उसे हम बिना भाषाई बदलाव के यहां लिख रहे हैं.


मैसेज में जो लिखा है, उसे हम बिना भाषाई बदलाव के यहां लिख रहे हैं.


भाइयों काफी किताबों में ढूंढने के बाद बड़ी मुश्किल से कोरोना वायरस की दवा मिली है, हम लोग कोरोना वायरस की दवा ना जाने कहां-कहां ढूंढते रहे लेकिन कोरोना वायरस की दवा इंटरमीडिएट की जन्तु विज्ञान की किताब में दी गई है जिस वैज्ञानिक ने इस बीमारी के बारे में लिखा है उसने ही इसके इलाज के बारे में भी लिखा है और यह कोई नई बीमारी नहीं है इसके बारे में तो पहले से ही इंटरमीडिएट की किताब में बताया गया है साथ में इलाज भी. कभी-कभी ऐसा होता है कि डॉक्टर और वैज्ञानिक बड़ी-बड़ी किताबों के चक्कर में छोटे लेवल की किताबों पर ध्यान नहीं देते और यहां ऐसा ही हुआ है. (किताब- जन्तु विज्ञान, लेखक- डॉ रमेश गुप्ता, पेज नं-1072) इससे मिलती जुलती कोई दवा ईजाद की जा सकती जो शायद कारगर साबित हो सके.


पड़ताल


इस मैसेज की पड़ताल के लिए लल्लनटॉप ने इंटरनेट खंगाला. प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो यानी PIB का ट्वीट मिला. जिसमें इस दावे को भ्रामक बताया गया है.



लगभग हर कोरोना वायरस की स्टोरी में आपको ये बेसिक बात बताई जाती है कि कोरोना वायरस कोई एक वायरस नहीं, वायरस की एक फैमिली का नाम है. इस फैमिली में सैकड़ों वायरस आते हैं. और इन सैकड़ों कोरोना वायरसों का डेंजर लेवल अलग-अलग होता है.


बहुत सारे कोरोना वायरस सिर्फ सर्दी ज़ुकाम लेकर निकल लेते हैं. और रमेश गुप्ता की किताब में जो दवाईयां लिखी हैं वो ज़ुकाम के लक्षणों को ठीक करने के लिए हैं. ये दवाइयां इस वाले वायरस के लिए नहीं हैं.


अभी हम जिस कोरोना वायरस का सामना कर रहे हैं वो रेस्पिरेटरी डिसीज़ कॉज़िंग कोरोना वायरस है. मतलब इससे सांस की तकलीफ होती है. न कि महज़ सर्दी ज़ुकाम. कन्फ्यूज़न न हो इसलिए इसे शुरुआत से ही नोवेल कोरोना वायरस कहा जा रहा है. नोवेल माने नया. लेटेस्ट. लेकिन ये हमेशा तो लेटेस्ट रहेगा नहीं. इसलिए बाद में इसका नाम बदलकर SARS-Cov-2 कर दिया. इससे होने वाली बीमारी का नाम है Covid-19.


जैसे हर कुत्ता एक जैसा नहीं होता. वैसे ही हर कोरोना वायरस एक जैसा नहीं होता. आप गली के कुत्ते को चप्पल लेके दौड़ा सकते हैं. स्पेशल फोर्सेज़ वाले जर्मन शेफर्ड को नहीं. हाल-फिलहाल में फैला कोरोनावायरस अलग किस्म का है.


नतीजा
कोरोना वायरस की दवाई को लेकर किया जा रहा दावा भ्रामक है. कोरोना वायरस की दवाई जब बन जाएगी तो उसका ऐलान स्वास्थ मंत्रालय करेगा. WHO करेगा. वॉट्सऐप पर आने वाले मैसेजेस पर भरोसा न करें. और न ही उन्हें  फॉरवर्ड करें.