भारत में लॉकडाउन 49 दिनों तक बढ़ सकता है ?


कुछ लोग हैं. वो रीसर्च करते हैं. वो रीसर्च करके ये बताते हैं कि हमारे लिए इलाज कहां छिपा हुआ है? हमारा कोरोना से आराम कहां हो सकता है? और यूं ही रीसर्च करने वाले लोगों ने सरकार से एक गुज़ारिश की है. कहा है कि अगर लॉकडाउन को कुछ दिन के लिए बढ़ा दिया जाए तो कोरोना से जुड़े मामलों को पूरी तरह रोका जा सकेगा. कितने दिन तक के लिए? लगभग 28 और दिनों के लिए. यानी लॉकडाउन की कुल सीमा 21+28 = 49 दिन. 


चेन्नई के इन्स्टिट्यूट ऑफ़ मैथमैटिकल साइंसेज़ और कैमब्रिज यूनिवर्सिटी ने मिलकर एक रीसर्च किया. रीसर्च करने आए राजेश सिंह और आर अधिकारी. रीसर्च में बात रखी कि भारत की सामाजिक संरचना में कोरोनावायरस चीन और इटली की तुलना में अलग तरीक़े से काम करेगा. ग्राफ़ की मदद से मामला समझाया गया है. कहा गया है कि 21 दिनों का लॉकडाउन ख़त्म होने तक भारत में कोरोना के केसों के बढ़ने की गति धीमी हो जाएगी. लेकिन जैसे ही लॉकडाउन ख़त्म होगा, उसके बाद तेज़ी से केस बढ़ने शुरू होंगे. देखिए इस बारे में इन वैज्ञानिकों का ग्राफ़ क्या कहता है : 



ऊपर दिए गए ग्राफ़ की मानें तो लॉकडाउन ख़त्म होने के एक महीने के भीतर भारत में अभी मिल रहे कोरोना के केसों में 6 गुना से ज़्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है. और तो और 2700 से ज़्यादा मौतें हो सकती हैं. अब ये तो हो गयी दिक़्क़त. ऐसे में वैज्ञानिकों ने उपाय क्या गिनाए हैं? दो उपाय हैं. एक तो हमने बताया. लॉकडाउन को बढ़ाकर 49 दिनों तक के लिए कर दिया जाए. ऐसे लॉकडाउन की अवधि मई महीने के दूसरे-तीसरे हफ़्ते तक पहुंच जाएगी. ऐसे में कोरोनावायरस का इन्फ़ेक्शन आख़िर में 50 लोगों तक ही पहुँच पाएगा.



इसके अलावा एक और उपाय है. कहा है कि ये वाला लॉकडाउन, जो चल रहा है, उसके ख़त्म होने के बाद 5 दिनों का ब्रेक दिया जाए. इस ब्रेक में इंफ़ेक्शन कुछ दिनों तक बढ़ेगा. उसके बाद 28 दिनों का लॉकडाउन लगा दिया जाए. 28 दिनों का लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद 5 दिनों का ब्रेक. उसके बाद फिर से 18 दिनों का लॉकडाउन. रीसर्च के ज़रिए अनुमान लगाए जा रहे हैं कि ऐसा करके भी इंफ़ेक्शन को 50 लोगों तक सीमित किया जा सकता है. 


कहा जा रहा है कि इस मॉडल और रीसर्च को भारत सरकार के पास प्रस्ताव की तरह भेजा भी गया है. लेकिन इस मॉडल की अपनी कुछ सीमाएं भी हैं. ये रीसर्च एक निपट जैविक यानी बायलॉजिकल समस्या को गणित के ज़रिए देख रहा है. और जैसा इस रीसर्च में दावा किया गया है कि इस रीसर्च को एक जनरल सेटिंग के साथ अंजाम दिया गया है. एक आदर्श सेटिंग के साथ. असल समाज में सोशल डिसटेंसिंग और लॉकडाउन इस समय कितना कारगर है, उससे इस रीसर्च के परिणामों पर असर पड़ सकता है. 


 


साभार - the lallantop